Bhopal News: मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर अपनी विवादास्पद टिप्पणी को लेकर एक बार फिर माफी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई से ठीक दो दिन पहले, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में संयम बरतने का वादा किया है। यह चौथा मौका है जब शाह ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया है।
वीडियो संदेश में शाह ने कहा कि उनका इरादा किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या किसी भी समाज का अपमान करना नहीं था। उन्होंने अपनी टिप्पणी को ‘देश भक्ति के उत्साह और आवेश’ में निकले शब्द बताया।

“वे शब्द निस्संदेह मेरी भावना के अनुरूप नहीं थे। वे शब्द देश भक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकले थे। मैंने अंत:करण से क्षमा याचना की है, कई बार की है, आज फिर कर रहा हूं। भविष्य में वाणी पर नियंत्रण रहेगा, ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।” — विजय शाह, मंत्री, मध्य प्रदेश सरकार
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला पिछले साल 11 मई का है, जब मंत्री विजय शाह इंदौर के महू स्थित रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उस दौरान उन्होंने सेना की एक महिला अधिकारी का जिक्र करते हुए एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

उन्होंने कहा था, “उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा। हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।” इस बयान के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट में 9 फरवरी को सुनवाई
मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में 9 फरवरी को सुनवाई होनी है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। अब सरकार को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है।
सरकार मांग सकती है अतिरिक्त समय
सूत्रों के मुताबिक, मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से और समय की मांग कर सकती है। सरकार यह दलील दे सकती है कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण की आवश्यकता है।
बताया जा रहा है कि सरकार ने इस कानूनी मसले पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अटॉर्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह-मशविरा किया है।
इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है, जिसमें प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांग चुकी है। शाह की ताजा माफी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले मामले की गंभीरता को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।