Ujjain News : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मध्यप्रदेश सरकार ने उज्जैन में 100 एकड़ जमीन पर फूलों का विशेष उत्पादन क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
धार्मिक नगरी उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य मंदिरों में साल भर फूलों की भारी मांग रहती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने व्यावसायिक पुष्प उत्पादन क्लस्टर की कार्य योजना तैयार की है।
सिंहस्थ के दौरान कई गुना बढ़ जाती है मांग
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने बताया कि सिंहस्थ मेले में करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना के लिए फूलों की मांग कई गुना बढ़ जाती है।
मंत्री ने कहा कि अब बाहर से फूल मंगाने की बजाय स्थानीय किसानों द्वारा उत्पादित फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।
किसानों को मिलेगी उन्नत तकनीक और प्रशिक्षण
क्लस्टर के माध्यम से उज्जैन और आसपास के किसानों को गुलाब, गेंदा, जरबेरा, रजनीगंधा, सेवंती और ग्लेडियोलस जैसे अधिक मांग वाले फूलों की वैज्ञानिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
मंत्री कुशवाह ने स्पष्ट किया कि पुष्प उत्पादन को पारंपरिक खेती न मानते हुए कृषि-उद्यम के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बीज से बाजार तक मिलेगा पूरा सहयोग
सरकार किसानों को उन्नत किस्मों के पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। साथ ही आधुनिक खेती तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
कोल्ड स्टोरेज और भंडारण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को मंडी और बाजार से सीधा जुड़ाव मिलेगा। पुष्प प्रसंस्करण इकाइयों से भी कनेक्शन दिया जाएगा।
प्रदेश को बनाना है नंबर वन
मंत्री कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही पुष्प उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उज्जैन में 100 एकड़ का यह क्लस्टर राज्य को पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में नंबर वन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
इस पहल से न सिर्फ सिंहस्थ के दौरान फूलों की आपूर्ति सुचारू रहेगी, बल्कि किसानों को भी स्थायी आजीविका का साधन मिलेगा।