उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में साल 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। आमतौर पर यह त्योहार 14 जनवरी को होता है, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को सूर्यास्त के बाद मकर राशि में प्रवेश करेंगे। धर्मशास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद संक्रांति होने पर पर्व का पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है।
इसी मान्यता के तहत महाकाल मंदिर में मकर संक्रांति से जुड़ी सभी परंपराएं 15 जनवरी को निभाई जाएंगी। इस दिन तड़के होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल का तिल के उबटन से विशेष स्नान कराया जाएगा। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र और चांदी के आभूषण धारण कराए जाएंगे।
तिल स्नान और भोग की अनूठी परंपरा
महाकालेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति पर तिल स्नान की परंपरा सदियों पुरानी है। पुजारी और पुरोहित भस्म आरती के दौरान भगवान को तिल का उबटन लगाकर ठंडे जल से स्नान कराते हैं। इसके बाद उन्हें तिल और गुड़ से बने विभिन्न पकवानों जैसे लड्डू और गजक का महाभोग लगाया जाता है। यह अनूठी परंपरा केवल महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है और इसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
यह है ज्योतिषीय समीकरण
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। साल 2026 में सूर्य का यह राशि परिवर्तन 14 जनवरी की शाम को होगा। चूंकि यह सूर्यास्त के बाद होगा, इसलिए इसका पुण्यकाल और त्योहार 15 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इससे पहले 2024 में 15 जनवरी को और 2025 में 14 जनवरी को संक्रांति मनाई गई थी। आने वाले वर्षों में 2027 और 2028 में भी यह पर्व 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। यह तिथियों का परिवर्तन ज्योतिषीय गणना पर आधारित होता है।