महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में उमड़ा सैलाब, इस साल 5.50 करोड़ भक्तों ने किए दर्शन, दान का आंकड़ा 100 करोड़ के पार

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या ने इस साल सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ‘महाकाल लोक’ के निर्माण के बाद से ही यहां आने वाले भक्तों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। मंदिर प्रबंधन समिति के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में लगभग 5 करोड़ 50 लाख श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दरबार में शीश नवाया है।

भक्तों की इस भारी भीड़ का सीधा असर मंदिर की आय पर भी पड़ा है। श्रद्धालुओं ने मुक्त हस्त से दान किया है, जिसके चलते इस वर्ष मंदिर को 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दान स्वरूप प्राप्त हुई है। यह राशि पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।

महाकाल लोक का जादुई असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘श्री महाकाल लोक’ का लोकार्पण करने के बाद से उज्जैन में धार्मिक पर्यटन का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। पहले जहां विशेष पर्वों पर ही भीड़ उमड़ती थी, अब सामान्य दिनों में भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, वीकेंड और छुट्टियों के दौरान यह संख्या और भी बढ़ जाती है।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था में कई बदलाव भी किए हैं ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सुगम दर्शन सुनिश्चित हो सकें। लड्डू प्रसादी की मांग भी कई गुना बढ़ गई है, जिसे पूरा करने के लिए मंदिर समिति ने अतिरिक्त इंतजाम किए हैं।

दान से विकास कार्यों को मिलेगी गति

मंदिर समिति को प्राप्त हुए 100 करोड़ से अधिक के दान का उपयोग मंदिर के विस्तार और भक्त सुविधाओं को बढ़ाने में किया जाएगा। इसमें धर्मशालाओं का निर्माण, अन्नक्षेत्र का विस्तार और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि दान की राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से श्रद्धालुओं की सेवा के लिए ही किया जाता है।

सुरक्षा और व्यवस्था पर जोर

इतनी बड़ी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए पुलिस और मंदिर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ा दी गई है और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई गई है। विशेष पर्वों जैसे सावन, महाशिवरात्रि और नागपंचमी पर भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाती है।

उल्लेखनीय है कि महाकाल लोक के भव्य गलियारे, मूर्तियों और नक्काशी ने न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी उज्जैन को एक नई पहचान दी है। देश-विदेश से लोग इस भव्यता को निहारने आ रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बूस्ट मिला है।