एमपी में राजनीतिक हलचल तेज, उज्जैन महापौर चुनाव मामले में कोर्ट का अहम आदेश, अब होगी विस्तृत सुनवाई

मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर निगम महापौर चुनाव 2022 से जुड़े विवाद में अदालत ने अहम मोड़ लाने वाला आदेश दिया है। प्रधान जिला न्यायाधीश पीसी गुप्ता की अदालत ने चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए प्रतिवादियों की प्रारंभिक आपत्तियां खारिज कर दी हैं। इस आदेश के बाद अब याचिका पर विस्तृत सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

अदालत ने 19 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने आवश्यक तथ्यों का उल्लेख शपथपत्र सहित किया है। आदेश में यह भी दर्ज है कि प्रतिवादियों की ओर से लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया स्वीकार योग्य नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना साक्ष्य यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि याचिका असत्य या निराधार है। इसी आधार पर याचिका निरस्त करने के आवेदन खारिज कर दिए गए।

क्या है पूरा चुनावी मामला

यह मामला 17 जुलाई 2022 को हुए उज्जैन महापौर चुनाव से जुड़ा है। कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार ने परिणाम को चुनौती दी है। घोषित परिणाम के मुताबिक परमार को 1,33,317 मत मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी मुकेश टटवाल को 1,34,240 मत प्राप्त हुए। इस तरह परमार की हार 923 मतों से घोषित की गई थी।

याचिका में कहा गया है कि मतगणना के बाद घोषित आंकड़े सही नहीं थे। याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने तत्काल लिखित रूप में पुनर्मतगणना की मांग की थी, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। याचिका में यह भी आरोप है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने शुरू में आश्वासन दिया था कि आंकड़े गलत पाए जाने पर रिकाउंटिंग होगी, पर बाद में मांग ठुकरा दी गई।

रिकॉर्ड और फॉर्म 21-क पर सवाल

चुनाव याचिका में प्रारूप 21-क में गलत प्रविष्टियां दर्ज करने का आरोप भी लगाया गया है। सबसे गंभीर आरोप मतदान केंद्र क्रमांक 274 को लेकर है। याचिका के अनुसार इस केंद्र पर महेश परमार को 277 मत मिले थे, लेकिन रिकॉर्ड में 217 मत दर्ज किए गए। साथ ही 60 वैध मतों को अनुचित रूप से अस्वीकृत किए जाने का दावा किया गया है।

याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि इन बिंदुओं की निष्पक्ष जांच और साक्ष्य आधारित परीक्षण होता है तो परिणाम पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं प्रतिवादी पक्ष ने इन आरोपों को प्रारंभिक स्तर पर ही अस्वीकार करने की मांग की थी। अदालत ने फिलहाल इन दलीलों पर अंतिम टिप्पणी करने से इनकार किया है और कहा है कि सत्यता का परीक्षण साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

किसने दी थीं आपत्तियां, अदालत ने क्या कहा

महापौर मुकेश टटवाल, निर्दलीय प्रत्याशी बाबूलाल चौहान तथा जिला निर्वाचन अधिकारी एवं रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत आवेदन दायर किए गए थे। इन आवेदनों में कहा गया था कि याचिका में वाद कारण का अभाव है, तथ्य छिपाए गए हैं और सत्यापन विधि के अनुरूप नहीं है। प्रतिवादियों ने अदालत से चुनाव याचिका को प्रारंभिक चरण में ही खारिज करने की मांग की थी।

अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि याचिका में जरूरी तथ्य शपथपत्र के साथ रखे गए हैं और इन्हें बिना साक्ष्य के निराधार नहीं कहा जा सकता। अदालत का रुख यह रहा कि प्रारंभिक आपत्तियों के आधार पर याचिका खारिज करना उचित नहीं होगा, क्योंकि विवादित बिंदुओं की जांच सुनवाई और प्रमाणों के जरिए ही संभव है।

“बिना साक्ष्य यह नहीं माना जा सकता कि याचिका असत्य या निराधार है।” — न्यायालयी आदेश का सार

अब आगे की प्रक्रिया क्या होगी

इस आदेश के बाद चुनाव याचिका अब नियमित सुनवाई के चरण में जाएगी। पक्षकारों को अपने-अपने दावे और प्रतिवाद साक्ष्य के साथ रखने होंगे। मतगणना, पुनर्मतगणना की मांग, फॉर्म 21-क की प्रविष्टियों और मतदान केंद्र क्रमांक 274 से जुड़े दावों की जांच इसी प्रक्रिया में की जाएगी।

यह विवाद 2022 के चुनाव परिणाम से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अदालत ने अभी किसी आरोप को सिद्ध या असिद्ध नहीं माना है। मौजूदा आदेश केवल इतना तय करता है कि मामला सुनवाई योग्य है और इसे तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत न्यायिक परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।