उज्जैन: गेहूं में रखी कीटनाशक की गैस बनी काल, नानी के घर छुट्टियां मनाने आए 2 मासूमों की मौत

Ujjain News: उज्जैन में एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है, जहां गेहूं को कीड़ों से बचाने के लिए रखी गई कीटनाशक की गैस ने दो मासूम बच्चों की जान ले ली। इस घटना में तीन अन्य बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है। गर्मी की छुट्टियां मनाने नानी के घर आए परिवार के लिए यह खुशियां मातम में बदल गईं।
मायके आई थीं दो बहनें, एक कमरे में सो रहा था पूरा परिवार
सूत्रो के मुताबिक हादसा इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स में रहने वाले लालचंद प्रजापत के घर हुआ। लालचंद की दो बेटियां, पूजा (शाजापुर) और रीना (कायथा), करीब 10 दिन पहले अपने बच्चों के साथ गर्मी की छुट्टियां बिताने मायके उज्जैन आई थीं। सोमवार की रात पूरा परिवार एक ही कमरे में सोया था, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसी कमरे में रखा अनाज उनके लिए जानलेवा साबित होगा।
कैसे हुआ हादसा?
सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि कमरे में लगभग 4 क्विंटल गेहूं रखा था, जिसे सुरक्षित रखने के लिए परिवार ने एक सप्ताह पहले बाजार से कीटनाशक (सल्फास जैसी दवा) की 7 पुड़िया लाकर डाली थीं। रातभर बंद कमरे में कीटनाशक से जहरीली गैस बनती रही।
  • मंगलवार सुबह: करीब 9 बजे सबकी तबीयत बिगड़ने लगी। डेढ़ माह की मासूम त्रिशा के मुंह से झाग निकलने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां शाम को उसकी मौत हो गई।
  • बुधवार सुबह: 4 साल की अनिका (अन्नू) ने भी दम तोड़ दिया।
अभी 11 अप्रैल को ही परिवार ने अनिका का जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया था, जिसकी यादें अब आंसुओं में बदल गई हैं।
तीन बच्चों की हालत गंभीर, एक इंदौर रेफर
घटना में प्रभावित अन्य बच्चों का उपचार जारी है:
  1. जेनिशा: हालत नाजुक होने के कारण इंदौर रेफर किया गया है।
  2. रेहान व येशु: उज्जैन के निजी अस्पताल में भर्ती हैं।
डॉक्टरों और पुलिस की जांच
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि शिशु रोग विशेषज्ञ के अनुसार, गेहूं में रखने वाली सल्फास की गोलियां हवा के संपर्क में आकर फॉस्फीन गैस बनाती हैं। यदि कमरे में वेंटिलेशन (खिड़कियां) न हो, तो यह गैस जानलेवा साबित होती है। छोटे बच्चों की श्वसन क्षमता कम होने के कारण उन पर इसका असर सबसे पहले और सबसे घातक होता है।
नानाखेड़ा पुलिस और एफएसएल (FSL) की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारणों की पुष्टि हो पाएगी।

सावधानी नोट: कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अनाज में कीटनाशक डालने के बाद उस कमरे को कम से कम 7-10 दिनों तक पूरी तरह बंद रखना चाहिए और वहां किसी भी व्यक्ति का प्रवेश या सोना वर्जित होना चाहिए।