उज्जैन। देश भर में वसंत पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में इसकी छटा निराली रही। ऋतुराज वसंत का पहला आगमन भगवान महाकालेश्वर के आंगन में हुआ। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में तड़के हुई भस्म आरती के दौरान भगवान को गुलाल और सरसों के पीले फूल अर्पित कर वसंतोत्सव का आगाज किया गया।
मान्यता है कि उज्जैन में हर त्योहार की शुरुआत महाकाल के दरबार से ही होती है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए पुजारियों ने बाबा महाकाल को केसर, चंदन और सुगंधित द्रव्यों के साथ ऋतु पुष्प अर्पित किए। भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन पाकर हजारों श्रद्धालु अभिभूत हो गए। मंदिर परिसर में भस्म आरती के समय से ही ‘जय महाकाल’ के जयकारे गूंजते रहे।
सांदीपनि आश्रम में विद्यारंभ की होड़
दूसरी ओर, भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा की शिक्षा स्थली महर्षि सांदीपनि आश्रम में ज्ञान की देवी मां सरस्वती के जन्मोत्सव पर भारी भीड़ उमड़ी। यहां वसंत पंचमी के दिन बच्चों का विद्यारंभ संस्कार (पाटी-पूजन) कराने की विशेष परंपरा है। सुबह से ही अभिभावक अपने नौनिहालों को लेकर आश्रम पहुंचने लगे थे।
आश्रम के पुजारियों के अनुसार, वसंत पंचमी को अभूज मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं से अपनी शिक्षा ग्रहण की थी, इसलिए यहां से अक्षर ज्ञान की शुरुआत करना बच्चों के भविष्य के लिए अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
स्लेट पर ‘ओम’ लिख कर की शुरुआत
विद्यारंभ संस्कार के दौरान बच्चों के हाथों में स्लेट और चॉक थमाई गई। पुजारियों और अभिभावकों ने बच्चों का हाथ पकड़कर स्लेट पर प्रथम पूज्य गणेश का प्रतीक ‘स्वास्तिक’ और ‘ओम’ लिखवाकर उनकी शिक्षा का श्रीगणेश किया। इस दौरान आश्रम परिसर में मेले जैसा माहौल रहा। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे।
“सांदीपनि आश्रम में वसंत पंचमी पर विद्यारंभ संस्कार का विशेष महत्व है। यहां दर्शन मात्र से ही ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। आज हजारों बच्चों ने यहां से अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत की है।” — स्थानीय पुजारी
गौरतलब है कि उज्जैन के अन्य मंदिरों, जैसे चिंतामन गणेश और हरसिद्धि माता मंदिर में भी वसंत पंचमी पर विशेष अनुष्ठान किए गए। महाकाल मंदिर में गुलाल उड़ाकर यह संदेश भी दिया गया कि शिव की नगरी में अब होली के उत्सव की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है।