इंदौर, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती ने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में अपनी ही सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए नेताओं और अधिकारियों की चुप्पी पर निशाना साधा है।
उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर एक के बाद एक कई ट्वीट कर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि इंदौर के स्नेह नगर और पटेल नगर में दूषित पानी पीने से दो बच्चों समेत पांच लोगों की मौत की खबर ने उन्हें स्तब्ध कर दिया है। यह घटना प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि जब कोई वीआईपी या बड़ा नेता शहर में आता है, तो प्रशासन व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने में जुट जाता है। लेकिन आम गरीब जनता को साफ पीने का पानी तक मयस्सर नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हम गरीबों की जान की कीमत क्यों नहीं समझते?
“हम शर्मिंदा क्यों नहीं हैं? क्या हम सिर्फ वीआईपी मूवमेंट के लिए ही बने हैं? गरीबों के जीवन का कोई मोल नहीं है क्या?” — उमा भारती, पूर्व मुख्यमंत्री
उमा भारती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है। उन्होंने कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच अगर बुनियादी सुविधाएं ही लोगों को नहीं मिल पा रही हैं, तो ऐसे विकास का क्या अर्थ है।
घटना की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इंदौर के स्नेह नगर और आसपास के इलाकों में पिछले दिनों दूषित पानी की आपूर्ति हुई थी। इस पानी को पीने से कई लोग बीमार पड़ गए थे और उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान दो मासूम बच्चों और तीन वयस्कों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद स्थानीय रहवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
मुआवजे की मांग
उमा भारती ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार से मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया है, उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
वरिष्ठ नेत्री के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अपनी ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद उमा भारती द्वारा उठाए गए इन सवालों ने विपक्ष को भी बैठे-बिठाए मुद्दा दे दिया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।