केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दैनिक पौधारोपण संकल्प के पांच वर्ष पूरे होने पर 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजन पूसा स्थित एपी शिंदे हॉल, नॉस्क कॉम्प्लेक्स में होगा। यह कार्यक्रम उस पहल का सार्वजनिक पड़ाव माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत 19 फरवरी 2021 को अमरकंटक से हुई थी।
आयोजन की शुरुआत पौधारोपण से होगी। कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण में पांच पौधे लगाए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार, ये पौधे संकल्प की निरंतरता और आगे की हरित प्रतिबद्धता का प्रतीक होंगे। इसके बाद औपचारिक सत्र में ‘शिवराज सिंह चौहान द्वारा पौधारोपण के 5 वर्ष’ विषयक विशेष वीडियो और अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी।
मुख्य संबोधन में शिवराज सिंह चौहान अपने पांच साल के अनुभव साझा करेंगे। इसमें प्रतिदिन पौधा लगाने की प्रक्रिया, जनसहभागिता, व्यवहारिक चुनौतियां और आगे की दिशा पर चर्चा शामिल रहेगी। कार्यक्रम का फोकस पर्यावरण संरक्षण को नियमित सार्वजनिक व्यवहार से जोड़ने पर रहेगा, ताकि इसे केवल प्रतीकात्मक गतिविधि तक सीमित न रखा जाए।
कार्यक्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार के डॉ. चिन्मय पंड्या, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, पर्यावरणविद् पद्मश्री अनिल जोशी, साध्वी ऋतंभरा, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष झा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट अपने विचार रखेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले वक्ताओं के जरिए पर्यावरण, समाज, नीति और जनजागरूकता के पक्ष सामने रखे जाएंगे।
नर्मदा जयंती से शुरू हुआ दैनिक संकल्प
इस अभियान की शुरुआत 19 फरवरी 2021 को नर्मदा जयंती के अवसर पर हुई थी। अमरकंटक में नर्मदा तट पर ‘रुद्राक्ष’ और ‘साल’ के पौधे रोपकर शिवराज सिंह चौहान ने प्रतिदिन कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लिया था। इसके बाद यह क्रम लगातार जारी रहने का दावा किया गया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह क्रम नहीं रुका। चाहे वे मध्य प्रदेश में रहे हों, देश के अन्य हिस्सों में या विदेश यात्रा पर, पौधारोपण गतिविधि जारी रखी गई। इसी निरंतरता के आधार पर लगाए गए पौधों की संख्या अब 6 हजार से अधिक बताई गई है।
इस पहल का एक असर यह भी रहा कि पौधारोपण को व्यक्तिगत आदत के रूप में चर्चा मिली। सार्वजनिक जीवन में सामान्यतः अभियान तय तारीखों तक सीमित रहते हैं, लेकिन यहां दैनिक अनुशासन को केंद्र में रखा गया। इसी वजह से इसे एक व्यक्तिगत व्रत से आगे बढ़कर सहभागी मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
पूर्व अभियानों से बना व्यापक ढांचा
दैनिक संकल्प को समझने के लिए पहले के कार्यक्रमों की पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 2017 में नर्मदा सेवा यात्रा के समापन के साथ मध्य प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाने का उल्लेख किया जाता है। उस चरण में नदी, जंगल और जलवायु संरक्षण को एक साथ जोड़कर जनभागीदारी का ढांचा बनाया गया था।
इसी क्रम में ‘अंकुर अभियान’ शुरू किया गया, जिसमें नागरिकों को पौधा लगाकर उसकी फोटो या सेल्फी पोर्टल पर अपलोड करने और पौधे की देखरेख का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के तहत लगभग 1 करोड़ पौधे लगाए जाने की जानकारी दी जाती है। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी बढ़ी।
समय के साथ पौधारोपण को निजी अवसरों से जोड़ने की भी अपील की गई। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, जयंती या पुण्यतिथि जैसे मौकों पर पौधा लगाने की परंपरा को प्रोत्साहित किया गया। इस तरीके से पर्यावरणीय गतिविधि को स्मृति, परिवार और सामाजिक आयोजनों के साथ जोड़ा गया, जिससे अभियान का दायरा राज्य की सीमाओं से बाहर तक गया।
आयोजकों के मुताबिक, देश और विदेश में रहने वाले समर्थक भी अपने विशेष अवसरों पर पौधारोपण कर इस पहल से जुड़ते रहे हैं। 19 फरवरी का दिल्ली कार्यक्रम इसी क्रम में पांच साल की निरंतरता को रेखांकित करेगा। मंच से साझा होने वाले अनुभवों का उद्देश्य यही है कि पौधारोपण को एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक अभ्यास के रूप में अपनाया जाए।