Delhi News : उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सुर्या कांत की अगुवाई वाली वेकेशन बेंच ने 23 दिसंबर 2025 के हाई कोर्ट के फैसले को स्थगित करते हुए स्पष्ट किया कि सेंगर इस आधार पर जेल से बाहर नहीं आ सकेगा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक सस्पेंड करते हुए सेंगर को सख्त शर्तों के साथ जमानत देने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि सेंगर सात साल पांच महीने से अधिक समय जेल में बिता चुका है। हालाकि वह पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ केस में 10 साल की अलग सजा काट रहा है, जिससे उसकी रिहाई संभव नहीं हो पाई थी।
सीबीआई की दलील
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सेंगर नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद की सजा पा चुका है और एक अन्य मामले में भी दोषी है। उन्होंने तर्क दिया कि सेंगर की रिहाई पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगी।
“यह मामला विशेष है क्योंकि आरोपी दूसरे केस में भी सजा काट रहा है।” — चीफ जस्टिस सुर्या कांत
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मामले में ‘पीनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ की स्पष्ट पुष्टि हुई है। अपराध के समय कानून में कम से कम सात साल की सजा का प्रावधान था, जिसे बाद में संशोधित कर उम्रकैद तक बढ़ाया गया। यह संशोधन अनुच्छेद 20 का उल्लंघन नहीं है क्योंकि अपराध वही है, केवल सजा कठोर हुई है।
पृष्ठभूमि और विवाद
उन्नाव रेप केस 2017 में सामने आया था, जिसने देशभर में आक्रोश फैलाया। 2019 में सेंगर को दोषी ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। पीड़िता और उसका परिवार लगातार कहता रहा है कि आरोपी की रिहाई पर उनकी जान को खतरा है। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता और उसके समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी।
इस मामले में पीड़िता ने महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ दिल्ली में प्रदर्शन किया था, जहां पुलिस ने बल प्रयोग किया। बाद में पीड़िता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मुलाकात कर समर्थन मांगा था।
आगे की कार्यवाही
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए सुनवाई जारी रखने का संकेत दिया है। कोर्ट का झुकाव हाई कोर्ट का जमानत आदेश रद्द करने की ओर है। अगली सुनवाई में इस पर अंतिम निर्णय आने की संभावना है।