Ola-Uber के लिए नई नीति, अब हर टैक्सी में पैनिक बटन और GPS अनिवार्य, सीधे 112 से होगी निगरानी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ओला और उबर जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाओं के संचालन के नियम अब और सख्त होने जा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार ने यात्री सुरक्षा, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘उत्तर प्रदेश मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2024’ का मसौदा तैयार किया है। इस नई नीति के तहत सभी ऐप-आधारित टैक्सियों, बाइक और ऑटो-रिक्शा में पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाना अनिवार्य कर दिया जाएगा।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति में यात्री को तत्काल सहायता पहुंचाना है। ये सुरक्षा उपकरण सीधे पुलिस के आपातकालीन नंबर डायल 112 से जुड़े होंगे, जिससे किसी भी खतरे की आशंका पर यात्री की लोकेशन तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।

सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान

नई नीति के अनुसार, एग्रीगेटर कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म से जुड़ी हर गाड़ी में एक पैनिक बटन और एक फंक्शनल VLTD सिस्टम लगा हो। यदि कोई यात्री यात्रा के दौरान असुरक्षित महसूस करता है, तो वह पैनिक बटन दबा सकता है। बटन दबते ही एक अलर्ट यात्री की लाइव लोकेशन के साथ सीधे पुलिस कंट्रोल रूम (डायल 112) और एग्रीगेटर कंपनी के कंट्रोल रूम में पहुंच जाएगा।

इसके अलावा, नीति में कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल किए गए हैं:

  • ड्राइवर का पुलिस सत्यापन: कंपनियों को अपने साथ जुड़े हर ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा।
  • गाड़ियों का फिटनेस: सभी वाहनों को परिवहन विभाग से फिटनेस प्रमाण पत्र लेना होगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सड़क पर चलने के लिए सुरक्षित हैं।
  • राज्य में कंट्रोल रूम: सभी एग्रीगेटर कंपनियों को उत्तर प्रदेश में अपना एक कंट्रोल रूम स्थापित करना होगा, जो 24/7 काम करेगा।

कंपनियों की जवाबदेही होगी तय

अब तक ऐप-आधारित टैक्सी कंपनियां किसी भी अप्रिय घटना के लिए अक्सर ड्राइवरों को जिम्मेदार ठहराकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाती थीं। लेकिन नई नीति के लागू होने के बाद इन कंपनियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार माना जाएगा। परिवहन विभाग ने इस नीति का मसौदा लगभग तैयार कर लिया है और जल्द ही इसे अंतिम मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा।

इस नीति का उद्देश्य न केवल यात्रियों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाना है, बल्कि ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं को एक संगठित और विनियमित ढांचे के तहत लाना भी है। सरकार का मानना है कि इन कड़े नियमों से यात्रा के दौरान होने वाले अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।