शुक्रवार देर रात अमेरिकी कोर्ट ने टैरिफ से जुड़ा आदेश खारिज कर दिया। फैसले के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अदालत के निर्णय पर सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस फैसले के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि टैरिफ लगाना उनके विशेष अधिकारों में आता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने एक नया कदम घोषित किया। उनके मुताबिक, मंगलवार से दुनिया भर पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय आई, जब अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस तेज है। कोर्ट के फैसले और उसके बाद की इस घोषणा ने वैश्विक बाजारों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान शेयर बाजार की चाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके समय में बाजार में अच्छी तेजी रही है। इसी क्रम में उन्होंने अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति जारी रखने की बात कही। उनका कहना था कि इस नीति को रोकने की कोशिशों का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
“टैरिफ मेरे विशेष अधिकार हैं।” — डोनाल्ड ट्रंप
“अमेरिका फर्स्ट नीति जारी रहेगी, और जो भी सामने आएगा, उसे कुचल दिया जाएगा।” — डोनाल्ड ट्रंप
कोर्ट के फैसले के बाद नीति पर टकराव बढ़ा
अमेरिकी कोर्ट के फैसले ने टैरिफ ढांचे पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। हालांकि ट्रंप ने साफ संकेत दिया कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उनका फोकस टैरिफ को आर्थिक और रणनीतिक उपकरण की तरह इस्तेमाल करने पर बना हुआ है। अदालत के निर्णय और कार्यपालिका के दावे के बीच यह टकराव आगे भी चर्चा का विषय रह सकता है।
ट्रंप की टिप्पणी में दो बातें प्रमुख रहीं। पहली, फैसले की वैधता पर राजनीतिक सवाल। दूसरी, अधिकारों की व्याख्या पर सीधा दावा। इन दोनों बिंदुओं ने यह स्पष्ट किया कि टैरिफ सिर्फ व्यापारिक नीति का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक अधिकारों और राजनीतिक संदेश का भी केंद्र बन चुका है।
मंगलवार से 10% अतिरिक्त वैश्विक टैरिफ का संकेत
प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा बिंदु मंगलवार से 10% अतिरिक्त टैरिफ का संकेत रहा। ट्रंप ने इसे वैश्विक स्तर पर लागू करने की बात कही। यदि यह कदम लागू होता है, तो इसका असर अमेरिका के व्यापारिक भागीदारों पर एक साथ दिख सकता है। हालांकि विस्तृत श्रेणियां, अपवाद या लागू करने का तंत्र प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट नहीं किया गया।
इस तरह की घोषणा आम तौर पर कई स्तरों पर प्रभाव डालती है। आयात लागत, सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतें तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं। बाजार आम तौर पर ऐसे बयानों को जोखिम संकेत की तरह पढ़ते हैं, खासकर तब जब कानूनी स्थिति और नीति संकेत एक-दूसरे के उलट दिखें।
भारतीय बाजार बंद होने के बाद सोना-चांदी में तेजी
टैरिफ पर अमेरिकी घटनाक्रम का असर भारत में भी दिखा। भारतीय शेयर बाजार बंद होने के बाद सोने और चांदी में तेज बढ़त दर्ज की गई। बाजार विश्लेषण में आम तौर पर ऐसे हालात में बुलियन को सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है, और यही पैटर्न इस बार भी सामने आया।
भारत के लिए यह संकेत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक व्यापार तनाव बढ़ने पर रुपये, आयात लागत और कमोडिटी कीमतों पर एक साथ दबाव बन सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि मंगलवार से बताए गए अतिरिक्त टैरिफ पर औपचारिक कदम क्या होते हैं और अमेरिकी संस्थागत प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है।
कुल मिलाकर, शुक्रवार देर रात का कोर्ट आदेश, उसके बाद ट्रंप की सख्त प्रेस कॉन्फ्रेंस, और 10% अतिरिक्त वैश्विक टैरिफ का संकेत तीन ऐसे बिंदु हैं जिनका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले कारोबारी सत्रों में इक्विटी, करेंसी और बुलियन बाजार इन संकेतों पर प्रतिक्रिया देते रहेंगे।