उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा और राज्य के अन्य प्रमुख मंदिरों की मर्यादा बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित प्रदेश के 48 प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं, विशेषकर मुस्लिम समुदाय के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। विभिन्न मंदिर समितियों ने एकजुट होकर राज्य सरकार से इस संबंध में कड़े नियम बनाने की मांग की है।
मंदिर समितियों का बड़ा फैसला
चारधाम प्रबंधन से जुड़ी समितियों और तीर्थ पुरोहितों का तर्क है कि देवभूमि की धार्मिक शुचिता और परंपराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए यह निर्णय आवश्यक है। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि यह पाबंदी मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय पर लागू करने का विचार है। वहीं, सनातन धर्म से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव के कारण सिख, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को इस प्रस्तावित प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। वे पहले की तरह ही दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
इन धामों और मंदिरों पर होगा असर
प्रस्तावित योजना के अनुसार, उत्तराखंड के प्रमुख चारधामों के साथ-साथ यमुनोत्री और गंगोत्री क्षेत्र के अन्य सिद्धपीठों पर भी सख्ती बरती जाएगी। कुल 48 मंदिरों की सूची तैयार की गई है, जहां प्रवेश द्वारों पर पहचान पत्र की जांच और अन्य सुरक्षा मानकों को कड़ा करने का सुझाव है। मंदिर समितियों का मानना है कि तीर्थस्थलों की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल आस्था रखने वालों को ही गर्भगृह और मुख्य परिसर तक जाने की अनुमति मिलनी चाहिए।
प्रशासनिक प्रक्रिया और आगामी कदम
वर्तमान में यह प्रस्ताव राज्य सरकार के विचाराधीन है। सरकार इस मामले में कानूनी पहलुओं और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से अध्ययन कर रही है। इससे पहले भी उत्तराखंड के कुछ ग्रामीण इलाकों और मंदिर द्वारों पर गैर-सनातनियों के प्रवेश को वर्जित करने वाले बोर्ड लगाए जाने की खबरें सामने आई थीं, जिन पर प्रशासनिक स्तर पर संज्ञान लिया गया था। हालांकि, इस बार मंदिर समितियों ने आधिकारिक तौर पर सरकार को प्रस्ताव देकर इसे औपचारिक व्यवस्था बनाने की कवायद शुरू की है।
तीर्थ पुरोहितों का पक्ष
स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों के इन मंदिरों की अपनी एक विशिष्ट मर्यादा और सदियों पुरानी परंपराएं हैं। बाहरी हस्तक्षेप और गैर-धार्मिक गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसे कड़े नियमों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यदि सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है, तो आगामी यात्रा सीजन से चारधाम यात्रा के प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।