Indore News: इंदौर में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। नगर निगम परिषद की बैठक में कांग्रेस पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत का विरोध किए जाने के बाद भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को भाजपा द्वारा शहर के सभी 85 वार्डों में सामूहिक रूप से वंदे मातरम का गायन किया गया और कांग्रेस का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया गया।
नवलखा चौराहे से फूटा आक्रोश
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत वार्ड क्रमांक 64 से हुई, जहाँ पार्षद मनीष मामा शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का पुतला फूंका। इस दौरान कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा गया। पार्षद शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग राष्ट्रगीत का सम्मान नहीं कर सकते, उन्हें देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रविरोधी मानसिकता रखने वालों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए।
दिग्गज नेताओं ने संभाली कमान
भाजपा ने इस विरोध को जन-आंदोलन का रूप देते हुए शहर के प्रमुख स्थानों पर बड़े नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की। सांसद शंकर लालवानी ने नवलखा चौराहे पर, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बड़ा गणपति पर और विधायक रमेश मेंदोला ने स्कीम नंबर 78 में सामूहिक वंदे मातरम गान का नेतृत्व किया। इसके अलावा मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया और आकाश विजयवर्गीय जैसे प्रमुख नेताओं ने भी अलग-अलग वार्डों में उपस्थित रहकर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया।
कांग्रेस से पार्षदों को निकालने की मांग
भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेतृत्व को घेरा। उन्होंने मांग की कि यदि कांग्रेस वास्तव में राष्ट्रगीत का समर्थन करती है, तो वह परिषद बैठक में विरोध करने वाली पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल को तुरंत पार्टी से निष्कासित करे। मिश्रा ने कहा, “वंदे मातरम भारत की आत्मा का गीत है। इसके अपमान को इंदौर की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।”
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ नगर निगम के बजट सत्र की बैठक है। आरोप है कि जब राष्ट्रगीत शुरू हुआ, तब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना खान ने इसका विरोध किया और अपनी बात पर अड़िग रहीं। भाजपा का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उन क्रांतिकारियों का अपमान है जिन्होंने वंदे मातरम गाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
इंदौर में हो रहे इस चौतरफा विरोध ने अब कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है, जबकि भाजपा इसे देशप्रेम और अस्मिता से जोड़कर आगामी दिनों में और धार देने की तैयारी में है।