वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रसोई और शौचालय की स्थिति का निवासियों के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वास्तु विशेषज्ञों का कहना है कि गलत दिशा में बने ये स्थान नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं, जबकि उचित दिशा में निर्माण से सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य प्राप्त होता है।
अतीत में प्रकाशित रिपोर्टों में भी यह बताया गया है कि कई परिवारों ने वास्तु नियमों का पालन करने के बाद जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव महसूस किए।
रसोई के लिए अनुकूल दिशा
वास्तु के अनुसार रसोई का स्थान आदर्श रूप से घर के दक्षिण-पूर्व कोने में होना चाहिए। इसे ‘अग्नि कोण’ माना जाता है, जहां रसोई का चूल्हा या गैस स्टोव पूर्व दिशा की ओर मुख करके रखा जाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य लाभ और ऊर्जा संतुलन बेहतर होता है।
शौचालय के लिए उपयुक्त स्थान
विशेषज्ञों की सलाह है कि शौचालय या बाथरूम घर के उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में बनाए जाएं। यह स्थान जल तत्व और वायु प्रवाह के संतुलन के लिए उपयुक्त माना जाता है। शौचालय का दरवाजा हमेशा बंद रखना और इसके फर्श का स्तर घर के अन्य हिस्सों से नीचा रखना भी लाभदायक माना जाता है।
नियमों का पालन क्यों जरूरी
वास्तु दोष को दूर करने के लिए अक्सर घर के निर्माण के समय ही दिशा का ध्यान रखा जाता है। अगर निर्माण हो चुका है तो विशेषज्ञ कुछ उपाय सुझाते हैं, जैसे दिशा सुधार के लिए विशेष रंग, रोशनी और सजावट का प्रयोग।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सरल दिशा-निर्देशों के पालन से घर में संतुलन और शांति बनी रहती है।