वीबी-जी राम जी योजना से गांवों को मिलेगा 125 दिन का रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था होगी मजबूत: कैलाश विजयवर्गीय

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन (VB-G RAM G योजना) ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के संकल्प को जमीन पर उतारने का कार्य कर रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और मजबूत बनाना है, ताकि देश का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

मनरेगा से आगे बढ़कर 125 दिन का रोजगार

कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि जहां मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, वहीं नई वीबी-जी राम जी योजना में इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीण श्रमिकों को अधिक दिनों तक काम मिलेगा और गांवों में आर्थिक स्थिरता आएगी। योजना के तहत समयबद्ध कार्य, बेरोजगारी भत्ता और डिजिटल मस्टर रोल की व्यवस्था की गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

डिजिटल तकनीक से पारदर्शिता और निगरानी

मंत्री ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान मनरेगा में पारदर्शिता की भारी कमी थी। नई योजना में रियल टाइम डेटा अपलोड, जीपीएस और मोबाइल मॉनिटरिंग तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फ्रॉड डिटेक्शन की व्यवस्था की गई है। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सही लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचेगा, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

चार प्राथमिकताओं पर केंद्रित नया कानून

वीबी-जी राम जी योजना को चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर आधारित बताया गया है। इनमें जल संबंधी कार्य, कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण, आजीविका से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास और खराब मौसम के कारण काम में आने वाली कमी को कम करना शामिल है। जल सुरक्षा से खेती को बढ़ावा मिलेगा, बेहतर सड़कों और कनेक्टिविटी से बाजार तक पहुंच आसान होगी और भंडारण व आजीविका से जुड़ी संपत्तियों से ग्रामीण आय में वृद्धि होगी।

बुआई और कटाई के समय मजदूरों को राहत

कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि इस योजना में प्रावधान है कि बुआई और फसल कटाई के मौसम में 60 दिन तक योजना के तहत काम बंद रखा जाएगा, ताकि खेती के समय मजदूरों की कमी न हो। मनरेगा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। इसके अलावा नई योजना में मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक रूप से किया जा सकेगा, जबकि पहले 15 दिन में भुगतान होता था।

विजन 2047 के अनुरूप ग्रामीण विकास

मंत्री ने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के संकल्प के अनुरूप तैयार की गई है। इसके माध्यम से गांवों में विकास का मजबूत ढांचा खड़ा किया जा रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत देश की प्रगति में अहम भूमिका निभा सके।

ग्रामीण भारत बदला, इसलिए योजना भी बदली

उन्होंने कहा कि 2005 में जब मनरेगा शुरू हुई थी, तब ग्रामीण भारत की परिस्थितियां अलग थीं। उस समय ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 4.86 प्रतिशत रह गई है। कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और आजीविका के साधन बढ़े हैं। ऐसे में पुराना ओपन-एंडेड मॉडल आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के अनुरूप नहीं था, इसलिए रोजगार योजना को 2025 की जरूरतों के अनुसार पुनर्गठित किया गया है।

मनरेगा पर सबसे ज्यादा खर्च मोदी सरकार ने किया

कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि मनरेगा पर अब तक कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये मोदी सरकार के कार्यकाल में खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार और विकास को लेकर गंभीर है।

योजनाओं के नामकरण पर कांग्रेस पर निशाना

मंत्री ने कहा कि रोजगार योजना का नाम शुरू से महात्मा गांधी के नाम पर नहीं था। समय-समय पर कांग्रेस सरकारों ने योजनाओं के नाम बदले। पहले राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, फिर जवाहर रोजगार योजना, उसके बाद नरेगा और अंत में मनरेगा नाम रखा गया। इसी तरह ग्रामीण आवास योजना का नाम इंदिरा आवास योजना और ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का नाम राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बार-बार नाम बदलना सही था।

एक परिवार के नाम पर सैकड़ों योजनाएं और संस्थान

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने देश की करीब 600 योजनाओं, संस्थानों और पुरस्कारों के नाम एक ही परिवार के नाम पर रखे। खेल रत्न पुरस्कार भी राजीव गांधी के नाम पर रखा गया, जबकि उनका खेल से कोई विशेष योगदान नहीं था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी अपने या किसी अन्य के नाम पर योजनाओं का नाम नहीं रखा, बल्कि सेवा और कर्तव्य की भावना को प्राथमिकता दी।

ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाली योजना

मंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना सिर्फ पुरानी योजना का विकल्प नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली पहल है। यह योजना 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में गांवों की भागीदारी सुनिश्चित करेगी और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

पत्रकार वार्ता में रहे कई नेता मौजूद

इस अवसर पर भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक रमेश मेंदोला, मधु गहलोत, प्रदेश प्रवक्ता आलोक दुबे, महामंत्री महेश कुकरेजा, मीडिया प्रभारी वरुण पाल, मीडिया सहप्रभारी नितिन शर्मा और रितेश शर्मा भी उपस्थित रहे।