वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में गिद्धों की गणना पूरी, तीन दिवसीय सर्वे में 900+ पक्षी मिले, 7 प्रजातियां चिन्हित

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश वन विभाग के मार्गदर्शन में 20 से 22 फरवरी 2026 तक गिद्धों की विस्तृत त्रिदिवसीय गणना संपन्न की गई। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य टाइगर रिजर्व क्षेत्र में मौजूद गिद्धों की वास्तविक संख्या, उनकी विभिन्न प्रजातियों की पहचान तथा उनके प्राकृतिक आवास की स्थिति का आकलन करना था। विशेषज्ञों और वन अमले की टीमों ने अलग-अलग बीट और संवेदनशील स्थलों पर पहुंचकर वैज्ञानिक पद्धति से यह गणना की, ताकि सटीक और प्रमाणिक आंकड़े सामने आ सकें।

तीन दिनों में दर्ज हुई उल्लेखनीय संख्या

वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 20 फरवरी को 951 गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई। इसके बाद 21 फरवरी को 741 तथा 22 फरवरी को 844 गिद्धों का आंकड़ा सामने आया। अलग-अलग स्थानों पर की गई इस गणना से यह स्पष्ट हुआ कि रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की अच्छी-खासी मौजूदगी है। अधिकारियों का मानना है कि यह आंकड़े क्षेत्र में उपलब्ध भोजन, सुरक्षित आवास और अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों को दर्शाते हैं, जो गिद्ध संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

सात प्रजातियों की पहचान, भारतीय गिद्ध सबसे अधिक

वर्ष 2026 के सर्वे में कुल सात प्रजातियों की पहचान की गई। इनमें भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर) की संख्या सर्वाधिक पाई गई, जो इस क्षेत्र में उनकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है। इसके अलावा व्हाइट रंप्ड गिद्ध भी बड़ी संख्या में दर्ज किए गए। इजिप्शियन गिद्ध मध्यम संख्या में दिखाई दिए, जबकि रेड-हेडेड वल्चर अपेक्षाकृत कम पाए गए। प्रजातियों की यह विविधता क्षेत्र की पारिस्थितिक समृद्धि को रेखांकित करती है।

प्रवासी और दुर्लभ प्रजातियों की भी मौजूदगी

सर्वेक्षण के दौरान यूरेशियन ग्रिफॉन, हिमालयन ग्रिफॉन और सिनेरियस गिद्ध जैसी प्रवासी प्रजातियों की उपस्थिति भी दर्ज की गई। इन पक्षियों का यहां दिखाई देना इस बात का संकेत है कि टाइगर रिजर्व का पारिस्थितिकी तंत्र न केवल स्थानीय बल्कि प्रवासी प्रजातियों के लिए भी अनुकूल है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों का मिलना जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संरक्षण प्रयासों से बढ़ रही उम्मीद

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नियमित मॉनिटरिंग, जागरूकता कार्यक्रमों और संरक्षण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। भविष्य में भी इसी तरह की वैज्ञानिक और व्यवस्थित गणना जारी रखी जाएगी, ताकि गिद्धों की संख्या में स्थिरता बनाए रखने और उनकी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जा सके। यह पहल प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।