Washington/Islamabad: दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइन, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच चली 21 घंटे की लंबी शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है।
ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी (Blockade) करने का आदेश देने के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई है।
क्यों भड़के ट्रंप? वार्ता की विफलता के पीछे की शर्तें
इस्लामाबाद में हुई इस मैराथन बैठक में अमेरिका ने ईरान के सामने बेहद सख्त शर्तें रखी थीं। अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह त्याग दे और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) बंद करे। ईरान ने इन शर्तों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी टीम के खाली हाथ लौटने से नाराज ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप का दावा है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से 20 लाख डॉलर प्रति बैरल तक का अवैध टोल वसूल रहा है। इसी के विरोध में अमेरिका ने अपने दो युद्धपोत होर्मुज में गश्त के लिए तैनात कर दिए हैं।
भारत के लिए चिंता: तेल और गैस की सप्लाई पर ‘ब्रेक’ का डर
होर्मुज की नाकेबंदी भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों पर निर्भर है।
महंगाई का खतरा: भारत आने वाली अधिकांश तेल खेप इसी रास्ते से गुजरती हैं। यदि अमेरिकी नौसेना नाकेबंदी करती है और ईरान जवाबी कार्रवाई में रास्ता बंद करता है, तो भारत में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
LNG और LPG की किल्लत: औद्योगिक उपयोग के साथ-साथ घरेलू रसोई गैस (LPG) की सप्लाई भी बाधित हो सकती है।
रणनीतिक उलझन: हालिया संघर्ष के बावजूद ईरान ने भारतीय जहाजों को सीमित पहुंच की अनुमति दे रखी थी। लेकिन अब अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद ईरान का रुख ‘गैर-दुश्मन’ देशों के प्रति बदल सकता है।
ब्रेंट क्रूड $100 के पार, परमाणु युद्ध की चेतावनी
ट्रंप के इस ऐलान का असर बाजार पर तत्काल दिखा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर 102 डॉलर तक पहुंच गई हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है; यदि वास्तव में गोलीबारी शुरू होती है, तो कीमतें किसी भी हद तक जा सकती हैं।
उधर, ईरान ने भी पलटवार करते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी युद्धपोतों ने उसके रणनीतिक जलमार्ग को रोकने की कोशिश की, तो वह हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। यह तनाव न केवल एक क्षेत्रीय युद्ध, बल्कि परमाणु संघर्ष की ओर भी इशारा कर रहा है, जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है।
क्या है अमेरिका का ‘प्लान-बी’?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसेना के एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, अमेरिका एक ‘वैकल्पिक सुरक्षित समुद्री रास्ता’ बनाने पर विचार कर रहा है ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बिना रुकावट के जारी रहे। हालांकि, जानकारों का मानना है कि होर्मुज के भूगोल और ईरान की मारक क्षमता को देखते हुए, बिना किसी बड़े संघर्ष के नया रास्ता बनाना लगभग नामुमकिन है।
निष्कर्ष: फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें समुद्र के इस संकरे रास्ते पर टिकी हैं। अगर कूटनीति विफल रहती है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक मंदी भारत सहित पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।