भारत के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025 का बजट घोषित किया है, जो देश की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। इस बजट में सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं, जिनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था और उपभोग को बढ़ावा देना है। मध्यम वर्ग को विशेष लाभ मिला है, और देश की जीडीपी को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।
इस बार सरकार ने बजट का आकार बढ़ाकर 50,65,345 करोड़ रुपये कर दिया है, जो कि पहली बार 50 ट्रिलियन रुपये के पार गया है। पिछले कुछ वर्षों में इस बजट में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2023 में बजट 39.33 लाख करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 47.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए भरपूर प्रयास कर रही है।
दैनिक बजट: क्या है आंकड़ा?
अगर हम दिन के हिसाब से देखें तो सरकार हर दिन करीब 14,000 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह संख्या वित्तीय वर्ष 2025 के लिए निर्धारित बजट का परिणाम है। 2024 में यह राशि 13,000 करोड़ रुपये थी, और 2023 में यह 11,000 करोड़ रुपये थी। इस तरह से हर साल बजट में प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हो रही है, जो भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।
क्षेत्रवार बजट आवंटन: किसानों से लेकर स्वास्थ्य तक
बजट के इस हिस्से में सरकार ने कई अहम क्षेत्रों के लिए बजट आवंटित किया है:
- ग्रामीण विकास: 2.67 लाख करोड़ रुपये
- गृह विभाग: 2.33 लाख करोड़ रुपये
- कृषि क्षेत्र: 1.71 लाख करोड़ रुपये
- शिक्षा: 1.28 लाख करोड़ रुपये
- स्वास्थ्य, शहरी विकास और आईटी: 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक
- ऊर्जा, वाणिज्य और सामाजिक कल्याण: 60,000 करोड़ रुपये से अधिक
यह आवंटन दर्शाता है कि सरकार देश के विभिन्न क्षेत्रों को समान रूप से प्रोत्साहन दे रही है, ताकि समग्र विकास संभव हो सके।
आम आदमी के लिए खास घोषणाएं
वित्त मंत्री ने बजट को ‘जनता द्वारा, जनता के लिए’ बताया और यह भी कहा कि सरकार ने मध्यम वर्ग की आवाज सुनी है। ईमानदार करदाताओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई राहत उपायों की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय रुपये की गिरावट पर चल रही आलोचनाओं का खंडन करते हुए कहा कि यह केवल डॉलर के मजबूत होने की वजह से हुआ है, जबकि भारतीय मुद्रा अन्य मुद्राओं के मुकाबले स्थिर है।