साल 2025 अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और नए साल 2026 के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। नए साल के आगमन के साथ ही लोगों की नजरें कैलेंडर पर टिक जाती हैं, खासकर उन तिथियों पर जो धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रूप से खास होती हैं। हिंदू धर्म में व्रत और त्योहार सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये परंपरा, आस्था और सामाजिक मेल-जोल का प्रतीक भी होते हैं। होली, दिवाली, रक्षाबंधन, नवरात्रि जैसे पर्व पूरे समाज को एक सूत्र में बांधते हैं। ऐसे में साल 2026 का त्योहारों से भरा कैलेंडर लोगों के लिए पहले से ही उत्सुकता का विषय बना हुआ है।
हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 में भी पूरे वर्ष व्रत और त्योहारों की लंबी श्रृंखला देखने को मिलेगी। मकर संक्रांति से लेकर क्रिसमस तक, हर महीने कोई न कोई बड़ा पर्व या व्रत श्रद्धालुओं के जीवन में धार्मिक ऊर्जा भरता नजर आएगा। इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी, होली 4 मार्च और दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इसके अलावा ईद, मुहर्रम, बकरीद और क्रिसमस जैसी प्रमुख तिथियां भी सामने आ चुकी हैं। खास बात यह है कि साल भर पड़ने वाली सभी महत्वपूर्ण एकादशियां—जैसे जया, पापमोचिनी, निर्जला और प्रबोधिनी—भी पंचांग के अनुसार तय हो चुकी हैं, जिससे व्रत रखने वालों के लिए योजना बनाना आसान होगा।
जनवरी 2026 की शुरुआत धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहेगी। साल के पहले महीने में पौष पूर्णिमा, अंगारक संकष्टी चतुर्थी और मकर संक्रांति जैसे प्रमुख पर्व पड़ रहे हैं। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मनाया जाएगा, जो दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए खास माना जाता है। इसी महीने माघ मास की शुरुआत और रथ सप्तमी जैसे पर्व भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहेंगे।
फरवरी 2026 में माघ पूर्णिमा, विजया एकादशी और महाशिवरात्रि जैसे बड़े पर्व मनाए जाएंगे। खासतौर पर 15 फरवरी को पड़ने वाली महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। इसी महीने आमलकी एकादशी और फाल्गुन मास की शुरुआत भी होगी, जो आगे आने वाले होली पर्व की भूमिका तैयार करेगी।
मार्च 2026 रंगों और उत्सव का महीना रहेगा। 4 मार्च को होली का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। इससे पहले फाल्गुन पूर्णिमा और पापमोचिनी एकादशी आएगी। इसी महीने उगादि, राम नवमी और कामदा एकादशी जैसे धार्मिक अवसर भी पड़ेंगे। साथ ही 19 मार्च से रमजान की शुरुआत होने से यह महीना धार्मिक विविधता का सुंदर उदाहरण पेश करेगा।
अप्रैल 2026 में हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती जैसे शुभ पर्व मनाए जाएंगे। 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का दिन खरीदारी और नए कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाएगा। इसी महीने वैशाख मास की शुरुआत और नरसिंह जयंती भी श्रद्धालुओं के लिए खास रहेगी।
मई और जून 2026 में बुद्ध पूर्णिमा, शनि अमावस्या, निर्जला एकादशी और वट पूर्णिमा जैसे व्रत-त्योहार आएंगे। निर्जला एकादशी को वर्ष की सबसे कठिन एकादशी माना जाता है, जबकि वट पूर्णिमा विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है। इसी दौरान बकरीद और मुहर्रम जैसे इस्लामिक पर्व भी मनाए जाएंगे।
जुलाई और अगस्त 2026 में श्रावण मास की शुरुआत, गुरु पूर्णिमा, नाग पंचमी और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व पड़ेंगे। श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए खास होता है, वहीं 28 अगस्त को रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती देगा।
सितंबर और अक्टूबर 2026 में गणेश चतुर्थी, कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि और दशहरा जैसे बड़े पर्व मनाए जाएंगे। नवरात्रि के नौ दिनों तक शक्ति उपासना होगी और 20 अक्टूबर को दशहरा के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा।
नवंबर 2026 दीपावली की रोशनी से जगमगा उठेगा। 8 नवंबर को दीपावली, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 21 नवंबर को प्रबोधिनी एकादशी व तुलसी विवाह मनाया जाएगा। इसके साथ ही गुरु नानक जयंती भी इसी महीने श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी।
साल 2026 का समापन दिसंबर महीने में मोक्षदा एकादशी, गीता जयंती, दत्त जयंती और क्रिसमस जैसे पर्वों के साथ होगा। इस तरह पूरा साल धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सवों से भरा रहेगा, जो लोगों के जीवन में आस्था, उल्लास और परंपराओं की मिठास घोलता रहेगा।