यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची हेतु इंदौर की गैर है तैयार…रंगबिरंगी छटाओं के गर्व का वो पल कब आएगा बेशक इसका है इंतजार…लगभग पचहत्तर वर्षों से अनवरत जारी परम्परा ने उत्साह के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए…रंग से परहेज करने वाले लोगों के भी मुख राजबाड़े की तरफ मोड़ दिए…गगनभेदी मिसाइलें हो या इंदौरी मस्तानों की धूम मचाती टोली…रँगपंचमी की गैर में ही हम खेलते हैं असली होली…फाग का राग उमंग , तरंग से विस्मृत करता वितराग…कोई परवाह नहीं रहती हमें सफेद कपड़ों पर भी लग जाता रंगबिरंगा दाग…अलमस्त अंदाज को बयां करता मन मानस सड़कों पर होता है…यहां का बच्चा बच्चा भर पिचकारी अनजान को भी खुशी के रंगों से भिगोता है…विश्व की धरोहर बनने जा रही हमारी रँगपंचमी की पारंपरिक गैर बड़ी सुहानी है…इसकी शुरुआत की दास्तान भी अजीब और अतीत की बेहतरीन कहानी है…एक एक कर अनेक संस्कृति प्रेमियों ने इस परंपरा के उत्साह को समझा और आगे बढ़ाया…सृजनधर्मी शहर के बाशिंदों ने जन जन के मन में बसे पर्व को प्रेम का रंग चढ़ाया…होलकर राजवंशकालीन होली कालांतर में रँगपंचमी की गैर का उत्साह बन गई…लोगों के हुजूम जुड़ते गए जन मन रैली स्वरूप में मुड़ते गए और फिर गैर वाह वाह बन गई…फिर शहर का एक युवा लखन बनकर श्याम रंग में राधा संग आया…उसने मातृशक्ति के लिए भी गैर का महत्व समझाया…गीले पानी की बौछारों से परे ये नई गैर रामरज , टेसू के फूल और प्राकृतिक रंगों के साथ सूखी हो गई…राधाकृष्ण फागयात्रा के साथ हिन्दरक्षक परंपराएं प्रारम्भ होकर गैर बहुमुखी हो गई…अब होली से प्रायः संकोच करने वाली नारी भी नर के उत्साह पर भारी है…रंग के खेल में भजन और धार्मिक झांकियों का संग…युवक युवतियों को भी जोड़कर मिटाने लगा हुड़दंग…शहर को नया मार्ग दिखाने वाली इस गैर की भी जनता आभारी है…अलग – अलग मुकाम से निकलकर गैरों का काफिला जब ऐतिहासिक राजबाड़े तक पहुँचता है…जमीन से लगाकर छतों तक ऐसा भी जनसैलाब उमड़ सकता है ये हर कोई सोचता है…रंग से ऊंची ऊंची इमारतों को भी बचाने हेतु बड़ी बड़ी पॉलीथिन लगाई जाती है…एक दिन के लिए अनेक उपायों के साथ नई ऊर्जा जगाई जाती है…भारत के सबसे स्वच्छ शहर की प्रमुख सड़कों पर चप्पल – जूते व कपड़ों का अंबार लग जाता है…सांझ ढलते ही स्वच्छता प्रेमी नागरिकों व सफाई मित्रों द्वारा ट्रकों से भरकर कचरा हटाया जाता है…अजीब है ये भी इस विशेष त्योहार की धूम मस्ती…जहां गम कम खुशियां ज्यादा और भांग हो जाती है सस्ती…यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत सूची में 145 देशों की अनेक अमूर्त विरासतें शामिल है…इंदौर की गैर भी उसके मापदंडों के काबिल है…अपने उत्साह के रंग को संस्कृति की बड़ी किताब में शामिल करने हेतु हम लालायित हैं…रँगपंचमी की गैर को यूनेस्को की धरोहर में शामिल करने को हम उत्साहित हैं…
