कहते हैं, जहाँ रोग, ऋण, शत्रु और संकट स्वयं रण छोड़कर भाग जाएँ, वही रणजीत कहलाते हैं। यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि इंदौर के आराध्य रणजीत हनुमान की जीवंत अनुभूति है। यहाँ “रण” केवल युद्ध नहीं, बल्कि जीवन के हर संघर्ष का प्रतीक है—और उस रण में शरण देने वाले हैं रणजीत सरकार। इंदौरवासियों के लिए यह आस्था केवल मंदिर तक सीमित नहीं, बल्कि सांसों में रची-बसी एक परंपरा है।
इंदौर—जहाँ धर्म उत्सव बन जाता है और उत्सव जीवनशैली
इंदौर धर्म और संस्कृति की वह अद्भुत नगरी है, जहाँ भक्ति सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि सामूहिक उत्सव होती है। अहिल्या उत्सव की गरिमा हो या रंग पंचमी की फाग यात्रा की मस्ती, गुरु नानक जयंती का संकीर्तन हो या रणजीत हनुमान की प्रभात फेरी—हर आयोजन में शहर का अलग ही रंग दिखता है। यह वही शहर है जहाँ ठिठुराती ठंड में भी सुबह चार बजे श्रद्धा लोगों को घर से खींचकर सड़कों पर ले आती है।
प्रभात फेरी—जहाँ नींद नहीं, भक्ति जीतती है
रणजीत हनुमान की प्रभात फेरी कोई साधारण धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था का महासागर है। बच्चे हों या बुजुर्ग, युवा हों या मातृ शक्ति—हर वर्ग के लोग इसमें समान उत्साह से शामिल होते हैं। कड़ाके की ठंड में भी हजारों श्रद्धालु केवल इसलिए पहुँच जाते हैं, क्योंकि उनके आराध्य नगर भ्रमण पर निकलते हैं। यह दृश्य अपने आप में इंदौर की भक्ति परंपरा की जीवंत तस्वीर पेश करता है।
नगर भ्रमण—राजा अपनी प्रजा के बीच
जिस तरह उज्जैन में महाकाल महाराज नगर भ्रमण पर निकलते हैं, उसी तर्ज पर रणजीत सरकार भी अपनी प्रजा का हाल जानने स्वयं नगर में निकलते हैं। यह कोई सामान्य प्रभात फेरी नहीं होती। ढोल-ताशे, बैंड-बाजे, लाइट-साउंड, आतिशबाजी और भव्य व्यवस्थाओं के साथ यह यात्रा एक चलती-फिरती श्रद्धा की महाकुंभ बन जाती है। स्वर्ण रथ पर विराजमान रणजीत सरकार के दर्शन के लिए सड़कों पर मानो आस्था उमड़ पड़ती है।
पलक-पावड़े, पुष्पवर्षा और भक्ति का सैलाब
जब रणजीत सरकार नगर भ्रमण पर निकलते हैं, तो श्रद्धालु पलक-पावड़े बिछाकर उनका स्वागत करते हैं। जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार, बंदनवार, पुष्पवर्षा और जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय हो उठता है। लाखों की संख्या में भक्त श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन को आतुर रहते हैं। यह परंपरा कोई नई नहीं—करीब 140 वर्षों से यह सिलसिला अनवरत चलता आ रहा है।
रणजीत हनुमान मंदिर—जहाँ मनोकामनाएँ बोलती हैं
रणजीत हनुमान मंदिर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि वह स्थान है जहाँ दर्शन मात्र से भक्तों के मनोरथ सिद्ध होने की अनुभूति होती है। यहाँ भगवान और भक्त के बीच एक सीधा संवाद स्थापित होता है—न शब्दों का, न तर्क का, बल्कि भावों का। यही कारण है कि यहाँ आने वाला हर व्यक्ति कुछ न कुछ पा लेता है—सुकून, शक्ति या समाधान।
व्यास परिवार—सेवा, सादगी और समर्पण की मिसाल
इस मंदिर की आत्मा हैं इसके पुजारी—व्यास परिवार। उनकी विनम्रता और सादगी देखते ही बनती है। दीपेश जी व्यास और उनके भाई-बंधु पूरी तन्मयता से रणजीत हनुमान की सेवा में समर्पित हैं। उनका व्यवहार, उनकी सरलता और भक्तों के प्रति अपनापन ही वह सूत्र है, जिसने ‘रणजीत समूह’ को एक परिवार की तरह जोड़े रखा है। मंदिर के हर आयोजन की सफलता के पीछे यही समर्पण सबसे बड़ी पूंजी है।
सेवा भी, साधना भी—रणजीत मंदिर के सामाजिक प्रकल्प
रणजीत हनुमान मंदिर केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यहाँ से कई सामाजिक सेवा प्रकल्प भी संचालित होते हैं, जो जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचाते हैं। प्रति मंगलवार और शनिवार को तो लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते ही हैं, लेकिन सामान्य दिनों में भी यहाँ भजन-कीर्तन और देव दर्शन का क्रम लगातार चलता रहता है।
रण में जीत का भरोसा—रणजीत की शरण
इंदौरवासियों का अटूट विश्वास है कि रणजीत सरकार हर किसी को रण में जीत दिलाते हैं—चाहे वह रण बीमारी का हो, कर्ज का हो या जीवन के किसी भी संकट का। जो भी रणजीत की शरण में आता है, उसके रोग, ऋण, कष्ट और शत्रु स्वयं रण छोड़कर भाग जाते हैं। यही आस्था, यही भरोसा रणजीत हनुमान को इंदौर की आत्मा बनाता है।