मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा ट्रेड ऐलान, भारत सहित कई देशों के लिए नए व्यापार ढांचे की घोषणा

मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी प्रशासन ने अपना आर्थिक फोकस भी स्पष्ट कर दिया है। व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 2026 व्यापार नीति एजेंडा जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी व्यापार रणनीति अब टैरिफ, सख्त कानूनी प्रवर्तन और नई शर्तों वाले समझौतों पर चलेगी। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि अमेरिका को अपनी खपत के अनुपात में घरेलू उत्पादन बढ़ाना होगा, ताकि अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मजबूत हों।

एजेंडे में दावा किया गया है कि अमेरिका इस समय इतिहास के सबसे बड़े व्यापार घाटे के दौर से गुजर रहा है। प्रशासन के मुताबिक हाइपर-ग्लोबलाइजेशन के वर्षों में 50 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां विदेश चली गईं और 70 हजार से ज्यादा कारखाने बंद हुए। दस्तावेज कहता है कि 2020 से बाइडेन प्रशासन के अंत तक वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार घाटा 40 प्रतिशत बढ़ा। इसी आधार पर मौजूदा नीति ढांचे को पलटने की जरूरत बताई गई है।

टैरिफ मॉडल पर व्हाइट हाउस का जोर

व्हाइट हाउस ने अपने टैरिफ-आधारित दृष्टिकोण को शुरुआती सफलता से जोड़ा है। प्रशासन का कहना है कि अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 तक हर महीने वस्तुओं का व्यापार घाटा साल-दर-साल घटा। इस दावे को एजेंडे में केंद्रीय संकेतक की तरह रखा गया है। दस्तावेज यह भी कहता है कि व्यापार नीति को अब केवल वाणिज्यिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा उपकरण की तरह देखा जा रहा है।

“यह सिर्फ बयानबाजी नहीं है, आंकड़े कहानी बताते हैं। अमेरिका वापस आ गया है।” — अमेरिकी व्यापार नीति एजेंडा 2026

एजेंडे के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और उनसे जुड़ी सेवाओं में उत्पादन बढ़ाने से वेतन, नवाचार और सुरक्षा क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। प्रशासन का तर्क है कि देश के औद्योगिक ढांचे को फिर से घरेलू स्तर पर खड़ा करना दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी है।

चीन पर आंकड़े और नई शर्तों की दिशा

दस्तावेज में चीन के साथ व्यापार घाटे में 2025 के दौरान 32 प्रतिशत कमी का दावा किया गया है। इसके साथ यह भी कहा गया कि 2000 के बाद पहली बार चीन वह साझेदार नहीं रहा, जिसके साथ अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापार घाटा दर्ज हो। एजेंडे में इसे मौजूदा रणनीति का प्रमुख परिणाम बताया गया है।

प्रशासन ने निर्यात प्रदर्शन का हवाला भी दिया है। एग्रीमेंट ऑन रेसिप्रोकल ट्रेड, यानी एआरटी कार्यक्रम शुरू होने के बाद वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 199.8 अरब डॉलर बढ़कर 3.4 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का दावा किया गया है। यह वृद्धि 6.2 प्रतिशत बताई गई है। 2025 में पूंजीगत वस्तुओं के निर्यात में 9.9 प्रतिशत बढ़ोतरी का आंकड़ा भी दस्तावेज में शामिल है।

चीन पर नीति रुख में एजेंडा दोहरी लाइन रखता है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका चीन के साथ व्यापार जारी रखना चाहता है, लेकिन नई व्यवस्थाएं पारस्परिकता और संतुलन पर आधारित होंगी। दस्तावेज के अनुसार अक्टूबर 2025 में बुसान में ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुआ समझौता इसी दिशा का पहला कदम था।

2026 के लिए छह प्राथमिकताएं तय

व्हाइट हाउस ने 2026 के लिए छह प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें एआरटी कार्यक्रम जारी रखना, व्यापार कानूनों का सख्त प्रवर्तन, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा, अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते यानी यूएसएमसीए की समीक्षा, चीन के साथ व्यापार प्रबंधन, और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाना शामिल है।

आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा को दस्तावेज में रक्षा और उद्योग से सीधे जोड़ा गया है। इसमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का हवाला देते हुए कहा गया है कि अमेरिका अपना औद्योगिक आधार युद्धकालीन जरूरतों के अनुरूप ढालेगा। साथ ही समान विचारधारा वाले देशों के साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर नए व्यापार समझौते की बात भी की गई है।

भारत सहित कई साझेदार देशों के साथ नई घोषणा

एआरटी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, मलेशिया और ताइवान के साथ समझौतों की जानकारी दी है। इसके अलावा भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ सहित अन्य साझेदारों के साथ ढांचा समझौतों की घोषणा की गई है।

दस्तावेज के अनुसार इन व्यवस्थाओं के तहत साझेदार देशों को टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम करनी होंगी, जबकि अमेरिका संशोधित टैरिफ ढांचा बनाए रखेगा। एजेंडे में दावा है कि कई साझेदार अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर लगभग सभी शुल्क खत्म कर रहे हैं। इसमें भारत के लिए औद्योगिक वस्तुओं पर 99 प्रतिशत और यूरोपीय संघ के लिए 100 प्रतिशत तक शुल्क समाप्ति का उल्लेख किया गया है।

यूएसएमसीए समीक्षा और नीति का निष्कर्ष

उत्तरी अमेरिका के संदर्भ में प्रशासन ने 2026 में यूएसएमसीए की संयुक्त समीक्षा का नेतृत्व करने की बात कही है। दस्तावेज में संकेत दिया गया है कि समझौते के नवीनीकरण की सिफारिश तभी की जाएगी, जब लंबित विवादों का समाधान संभव होगा। इस हिस्से से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन व्यापारिक समझौतों में स्वत: विस्तार के बजाय शर्त आधारित रुख अपनाने जा रहा है।

एजेंडे का निष्कर्ष बताता है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुश्किलों के बीच पुरानी नीतियों पर लौटना समाधान नहीं है। दस्तावेज में अब्राहम लिंकन की पंक्ति का संदर्भ देते हुए नए सिरे से सोचने और नए सिरे से काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। कुल मिलाकर, प्रशासन ने 2026 के लिए व्यापार नीति को सीधे औद्योगिक पुनर्निर्माण, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा ढांचे से जोड़ा है, जिसमें भारत समेत प्रमुख साझेदारों के साथ नई वार्ताएं निर्णायक भूमिका में दिखाई गई हैं।