पहाड़ों में क्यों फट रहे हैं बादल? अवैज्ञानिक खनन व निर्माण का बदला ले रही है प्रकृति!

देश को विकास की ओर ले जाने के चलते जिस तरह से प्रकृति का दोहन किया जा रहा है। उसके परिणाम अब प्रकृति दे रही है। जिसका एक नजारा हिमाचल प्रदेश सहित अन्य पहाड़ी राज्यो में देखने को मिल रहा है। पहाड़ी राज्यों में बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हिमाचल प्रदेश में इस साल लगभग 38 से अधिक बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं जो पिछले साल से अधिक हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक निर्माण के कारण ऐसी आपदाएं बढ़ रही हैं।
केंद्रीय टीम कर रही है जांच
पहाड़ी राज्यों में बादल फटने की घटनाएं कुछ वर्षों से बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। हिमाचल प्रदेश में अब तक 38 बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं, जो पिछले साल से ज्यादा हैं। साल 2024 में 27 के करीब बादल फटने की घटनाएं हुई थीं। लेकिन इस बार डेढ़ माह में पिछले साल का आंकड़ा पीछे छूट गया है। जिसकी जांच करने के लिए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण केंद्रीय टीम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है
मंडी जिला में सबसे अधिक बार फटे बादलहिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में ही सबसे अधिक बार बादल फटने की घटनाएं हुई है। यह जिला व्यास नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां पर सबसे अधिक एतिहासिक मंदिर स्थित है। इस वर्ष इस जिले में है 19 से अधिक बार बादल फटने की घटना रिकॉड की गई है। यहीं वह इलाका है जहां सबसे अधिक अवैध खनन भी होता है। जिसे रोकने गए एक अधिकारी पर भी हमला हुआ था इसके साथ ही यहां कई बार अवैध खनन में धंसने से कई मजदूरों की मौत भी हो चुकी है। स्थानिय प्रशासन यहां पर अवैध खनन रोकने में नाकाम हुआ है।

बादल फटने की घटना का पता लगाने का पैमाना क्या है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बादल फटने की घटना का पता लगाने का कोई स्टीक पैमाना नहीं है। जब भी कहीं 100 मिलीमीटर प्रति घंटा बारिश होती है तो इसे बादल फटने की घटना माना जाता है। इसके अलावा भारी बारिश व बाढ़ की स्थिति बन जाने को भी बादल फटना कहा जाता है।

पहाड़ी इलाकों में अवैध खनन से प्रकृति नाराज
पहाड़ी राज्यों में पहले भी बरसात होती थी व पहाड़ों के बीच मेघ बरसते थे पर इस तरह की तबाही नहीं होती थी। लेकिन जिन जिलों में अवैध खनन हो रहा है वहां पर प्रकृति अब नाराज हो चुकी है। विशेषज्ञ इस तबाही की असल वजह जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक खनन और निर्माण कार्य को मान रहे हैं। अवैज्ञानिक खनन व निर्माण के कारण यह आपदाएं आ रही हैं। यदि जल्द ही अवैध खनन पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो प्रकृति के प्रकोप से पहाड़ी राज्यों को कोई नहीं बचा पाएंगा।

केन्द्रिय टीम कर रही इन राज्यों में जांच

पहाड़ी इलाको में लगातार बादल फटने की घटनाओं के बाद केन्द्र की जांच टीम लगातार इन क्षैत्रों में प्राकृतिक आपदाएं आने के कारणों पर लगातार जांच रही है।  यहीं आपदा प्रबंधन केंद्रीय टीम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। विभिन्न विशेषज्ञों की टीम मंडी और शिमला में अध्ययन कर लौटी है, जो केंद्रीय गृह मंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद इन इलाकों में अवैध खनन रोकने पर सख्त कदम उठाएं जा सकते है।