Adobe के CEO शांतनु नारायण ने क्यों दे दिया इस्तीफा? AI की चुनौती या व्यक्तिगत फैसला

कैलिफोर्निया/नई दिल्ली। वैश्विक टेक जगत से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनी Adobe Inc. के भारतीय मूल के सीईओ शांतनु नारायण ने अपने पद से हटने की घोषणा कर दी है।
लगभग 18 वर्षों तक कंपनी का नेतृत्व करने और एडोब को फोटोशॉप से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग तक की ऊंचाइयों पर ले जाने वाले नारायण का यह फैसला तकनीकी उद्योग में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
इस्तीफे के बाद भी बनी रहेगी भूमिका
कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शांतनु नारायण तब तक पद पर बने रहेंगे जब तक एडोब बोर्ड एक नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं कर लेता। हालांकि, वे कंपनी से पूरी तरह नाता नहीं तोड़ रहे हैं। इस्तीफे के बाद भी वह बोर्ड के चेयरमैन के रूप में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे, ताकि नए नेतृत्व को उनका रणनीतिक मार्गदर्शन मिलता रहे।
हैदराबाद की गलियों से एडोब के शिखर तक
27 मई 1963 को हैदराबाद के एक तेलुगु परिवार में जन्मे शांतनु नारायण की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है। उनके पिता एक व्यवसायी थे और माता अमेरिकी साहित्य की प्रोफेसर थीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद के प्रसिद्ध पब्लिक स्कूल से की और उस्मानिया विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री ली।
उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका गए, जहाँ उन्होंने कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स और यूसी बर्कले से एमबीए किया। एडोब ज्वाइन करने से पहले उन्होंने Apple और सिलिकॉन ग्राफिक्स जैसी दिग्गज कंपनियों में काम किया था। वे 1998 में एडोब से जुड़े और अपनी कार्यकुशलता के दम पर 2007 में सीईओ के पद तक पहुँचे।
सैलरी और नेटवर्थ: दुनिया के सबसे महंगे सीईओ में शामिल
शांतनु नारायण का नाम दुनिया के सबसे अधिक वेतन पाने वाले अधिकारियों की सूची में शुमार रहा है।
  • सालाना पैकेज: वित्त वर्ष 2025 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका कुल वार्षिक पारिश्रमिक लगभग 51 मिलियन डॉलर (करीब 430 करोड़ रुपये) रहा। इसमें उनकी बेसिक सैलरी के अलावा बड़ा हिस्सा स्टॉक ऑप्शन्स और परफॉर्मेंस बोनस का है।
  • कुल संपत्ति: हुरून रिच लिस्ट 2025 के आंकड़ों के अनुसार, शांतनु नारायण की कुल नेटवर्थ लगभग 4,670 करोड़ रुपये आंकी गई है। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा एडोब में उनके पास मौजूद शेयर्स से आता है।
एडोब को कैसे बदला?
शांतनु नारायण के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि एडोब के बिजनेस मॉडल को बदलना रही। उन्होंने पारंपरिक सॉफ्टवेयर बिक्री मॉडल को छोड़कर ‘सब्सक्रिप्शन बेस्ड क्लाउड मॉडल’ (Creative Cloud) अपनाया। इसी साहसिक फैसले की बदौलत एडोब का मार्केट कैपिटलाइजेशन उनके कार्यकाल में कई गुना बढ़ गया। आज डिजिटल मार्केटिंग और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में एडोब के बिना काम करना असंभव माना जाता है।
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि नारायण के जाने के बाद कंपनी के सामने एआई (AI) के इस दौर में अपनी बादशाहत कायम रखने की बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि दुनिया की इस प्रतिष्ठित कंपनी की कमान अब किसके हाथों में सौंपी जाएगी।