भारत में सोना और चांदी खरीदना केवल आर्थिक निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। त्योहारों, शादियों और शुभ मौकों पर आभूषण खरीदना समृद्धि, सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में जब भी कोई ग्राहक ज्वेलरी शॉप से सोना या चांदी खरीदता है, तो जौहरी अक्सर उसे एक गुलाबी कागज में लपेटकर देते हैं, जिसे लोग बिना ज्यादा सोचे घर ले आते हैं।
पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
सोने-चांदी को गुलाबी कागज में लपेटने की यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। छोटे कस्बों की दुकानों से लेकर बड़े नामी ज्वेलरी शोरूम तक, लगभग हर जगह यही तरीका अपनाया जाता है। भले ही यह एक साधारण रिवाज जैसा लगे, लेकिन इसके पीछे केवल परंपरा ही नहीं बल्कि व्यावहारिक और वैज्ञानिक सोच भी छिपी है।
गुलाबी रंग क्यों लगता है ज्यादा आकर्षक
गुलाबी रंग स्वभाव से ही नरम और आंखों को सुकून देने वाला होता है। जब सोने की पीली चमक इस रंग की पृष्ठभूमि पर रखी जाती है, तो उसकी चमक और निखर जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गुलाबी रंग ग्राहक के मन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे आभूषण अधिक कीमती और सुंदर नजर आते हैं और खरीदारी का अनुभव बेहतर बनता है।
गहनों की सुरक्षा में भी कारगर
गुलाबी कागज आमतौर पर मुलायम और हल्की कोटिंग वाला होता है, जो सोने-चांदी के आभूषणों को खरोंच से बचाने में मदद करता है। यह नमी, पसीने और हवा में मौजूद हानिकारक तत्वों के संपर्क को भी कम करता है। इसी वजह से गहने लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और उनकी चमक बरकरार रहती है।
आस्था और शुभता से जुड़ा विश्वास
भारतीय मान्यताओं में सोना देवी लक्ष्मी से जुड़ा माना जाता है, जबकि गुलाबी और लाल रंग शुभ और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक होते हैं। माना जाता है कि गुलाबी कागज में लिपटा सोना बुरी नजर से सुरक्षित रहता है और घर में सौभाग्य लेकर आता है। इसी कारण इस परंपरा को आज भी आस्था के साथ निभाया जाता है।