2.40 करोड़ का काम अटका, 100 दिन की देरी ने ली लोगों की जान

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के पीछे नगर निगम की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जांच में यह साफ हो गया है कि जिस नर्मदा जल पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिल रहा था, उसे महीनों पहले बदला जाना था। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की, जिसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को अपनी सेहत और जान से चुकाना पड़ा।

टेंडर प्रक्रिया में देरी बनी बड़ी वजह

भागीरथपुरा क्षेत्र की नर्मदा पाइपलाइन बदलने के लिए 8 अगस्त को टेंडर जारी किया गया था। टेंडर खरीदने की अंतिम तिथि 15 सितंबर शाम 6 बजे तक तय थी, जबकि 17 सितंबर को दोपहर 12 बजे टेंडर खोले जाने थे। इस 2.40 करोड़ रुपए के टेंडर में कुल सात कंपनियों ने भाग लिया था। सभी ने समय पर आवेदन किया, लेकिन तकनीकी कारणों से एक कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लापरवाही बरती गई और काम अटका रह गया।

समय पर फैसला होता तो बच सकती थीं जानें

यदि टेंडर प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी कर ली जाती, तो अब तक भागीरथपुरा की पाइपलाइन बदली जा चुकी होती। ऐसे में नर्मदा जल में ड्रेनेज का पानी मिलने की समस्या खत्म हो सकती थी और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिकारियों की उदासीनता और टालमटोल ने इस गंभीर स्थिति को जन्म दिया।

निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े अफसरों पर सवाल

मामला उजागर होने के बाद नगर निगम ने केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी, जबकि निर्णय लेने वाले वरिष्ठ अधिकारी अब भी सवालों के घेरे में हैं। यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही की कमी को उजागर करती है और यह बताती है कि समय पर निर्णय न लेने से कितनी बड़ी त्रासदी हो सकती है।

मेयर के निर्देश भी रहे बेअसर

खुलासे में सामने आया है कि भागीरथपुरा के लोग पिछले छह महीनों से दूषित पानी पीने को मजबूर थे। लोगों ने नगर निगम और सीएम हेल्पलाइन पर लगातार शिकायतें कीं। छह महीने पहले ही इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सिस्टम की सुस्ती के कारण आज तक टेंडर स्वीकृत नहीं हो पाए। अब मेयर ने निगम आयुक्त को जांच के आदेश दिए हैं कि टेंडर प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हुई।

मुख्यमंत्री की सख्ती, प्रशासन में हलचल

दूषित पानी सप्लाई के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे मामले की समीक्षा भी की गई है।

इंदौर नगर निगम को मिले नए अपर आयुक्त

मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद शासन हरकत में आया है। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा सामान्य प्रशासन विभाग ने आकाश सिंह, प्रखर सिंह और आशीष कुमार पाठक को इंदौर नगर निगम का नया अपर आयुक्त नियुक्त किया है, ताकि व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके।