यह तकनीक उन मरीजों के लिए जीवन रेखा साबित हो रही है जो लंग ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे होते हैं। और हाल ही में पैराक्वाट जहर से पीड़ित 12 वर्षीय बालक पर सफल बाइलेटरल लोबर लंग ट्रांसप्लांट किया गया। यह केस वैश्विक स्तर पर बाल चिकित्सा लंग ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यह बात यशोदा ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के डॉ. बी. विश्वेश्वरन (MD, DNB, DM – पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर, गोल्ड मेडलिस्ट; सीनियर कंसल्टेंट–इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी एवं स्लीप मेडिसिन) ने अपने इंदौर प्रवास के दौरान एक प्रेस वार्ता में कही l